Friday, October 24, 2014

इंतज़ार....

मैं इंतज़ार करता हुं,
तेरे लौट आने का ऐ ज़िंदगी,
हर पल तेरी बाट जोहता हुं,
शायद ग़म है तेरे खो जाने का,

वो ज़ुस्तज़ू, वो ख्वाहिशें
अभी अधूरी हैं,
मुझे यकीं है तेरे आने का,
तू है तो वो पूरी हैं,

मैं इंतज़ार करता हुं,
तेरे लौट आने का ऐ ज़िंदगी,
तेरे लबों से फ़िर वो
बातें सुनना चाहता हूं,
उन हसीं ख्वाबों को
फ़िर से बुनना चाहता हुं,

तू ही दर्द , तू ही सुकूं
तू ही सुरूर, तू ही जुनूं
मेरी रज़ा है तुझमे ही,
हां तुझमे खो जाने की,
मेरी ख्वाहिश है
तुझको ही पाने की,

मैं इंतज़ार करता हुं,
तेरे लौट आने का ऐ ज़िंदगी!!