Saturday, November 8, 2014

लिखुंगा तेरे बारे में ऐ ज़िंदगी……

सोचता हूँ लिखुंगा तेरे
बारे  में भी ऐ ज़िंदगी ,

संघर्षों की धूप में ,
सफलताओं की छांव में ,
असफल पीड़ा के रुप में ,
प्रयत्निक छाले भरे पांव में ,

सत्य स्वप्नों की अभिलाषा में ,
मानसिक शांति की पिपासा में ,

रम सा गया हूँ,
पर लिखुंगा तेरे बारे में भी.………

आशा के उजालों में ,
निराशा के अंधकार में ,
मंज़िलों के लंबे रस्तों  में ,
उम्मीदों से लदे बस्तों में ,

कर्तव्यों की तल्लीनता में ,
काल की विहीनता में,

थम सा गया हूँ ,
पर सोचता हूँ, एक दिन
लिखुंगा तेरे
बारे  में भी ऐ ज़िंदगी !!